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राष्ट्र निर्माण में सरकारी कर्मचारियों का महान योगदान

राष्ट्र निर्माण में सरकारी कर्मचारियों का महान योगदान

आज के इस ग्लोबलाईजेशन के दौर में मल्टी नेशनल कम्पनियां भारत में अपने पैर जमा रही हैं और अपने कर्मचारियों को मोटे वेतन देकर अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर जब सरकारी कर्मचारी सरकार की सेवा करने का निर्णय लेता है तो उसे आस होती है कि उसका भविष्य सुरक्षि 

 त रहेगा। परंतु जब सरकार अपने ही कर्मचारियों का गला घोटनें की ठान ले तो कर्मचारियों के पास विरोध के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता हैं।

यदि सरकारी कर्मचारी के अधिकारों में कटौती होती है और उनको अच्छे वेतन नहीं मिलते हैं तो बेस्ट आWफ द ब्रेन कहीं न कहीं प्राईवेट सेक्टर की ओर भागता है जहां पर उसको लुभावने पैकेज नजर आते हैं। जबकि यह माना जाता था कि बेस्ट आWफ द ब्रेन सरकारी कर्मचारियों में होता है। हम यह भी नहीं भूल सकते कि सरकारी कर्मचारियों का राष्ट्रीय एकीकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान है।

भा.ज.पा. की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा से केन्द्रीय कर्मचारियों के हितों की उपेक्षा की है। चाहे] एन.डी.ए. की पिछली सरकार हो या वर्तमान की मोदी सरकार। वर्तमान में केन्द्र सरकार प्राईवेटाईजेशन की ओर जाने की राह पर है और सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों में कटौतियां करके केन्द्र सरकार प्राईवेट सेक्टर को फायदा पहुWचाना चाहती है।

मोदी सरकार नान-प्लान एक्सपेन्डिचर को अत्यधिक घटाना चाहती है जिसके लिए उनके पास एक आसान रास्ता है] जिसमें सेवानिवृति की उम्र कम कर दी जाए] मंहगाई भत्ते को मूल वेतन में न जोड़ा जाए और सातवें वेतन आयोग को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।

क्यास लगाऐ जा रहे हैं कि केन्द्र सरकार केन्द्रीय कर्मचारियों की सेवानिवृति की उम्र 60 से घटाकर 58] अध्यापकों की 62 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष] दिल्ली विश्वविद्यालय के अध्यापकों] वैज्ञानिकों व अन्यों की सेवानिवृति की उम्र 65 से घटाकर 60 वर्ष और न्यायधीशों की सेवानिवृति की उम्र 65 से घटाकर 62 वर्ष कम करने की फिराक में है। क्योंकि 2013&2014 में केन्द्रीय कर्मचारियों के वेतन व भत्तों की राशि 2-5 लाख करोड़ पहुWच गई थी और 74]076 करोड़ इसी पीरियड के दौरान पेन्शनधारियों व परिवारिक पेन्शन पर खर्च हुए थे। नान-प्लान एक्सपेन्डीचर का तकरीबन 80 प्रतिशत रेलवे] रक्षा] पेरा मिलिट्री फोर्स] डाक व रिवेन्यू आदि पर खर्च होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि 80 प्रतिशत नान-प्लान एक्सपेन्डिचर महत्वपूर्ण विभागों पर खर्च किया जाता है।

भा.ज.पा. की केन्द्र सरकार ने हमेशा से केन्द्रीय कर्मचारी विरोधी नीतियों को अपनाया है जो कि भा.ज.पा. की पिछली एन.डी.ए. सरकार के कार्यकाल से पता चलता है। उनके कार्यकाल में नये कर्मचारियों के लिए पेन्शन को खत्म कर दिया था। कर्मचारियों के जी.पी.एफ. की राशि के उपर मिलने वाले ब्याज को 12 से 8 प्रतिशत कर दिया था और सी.एल. 12 से घटाकर 8 कर दी थी। सीधी भर्तियों में दो तिहाई की कटौती कर दी थी।

ज्ञात हो कि भा.ज.पा. की हरियाणा सरकार ने भी सत्ता में आते ही राज्य कर्मचारियों की सेवानिवृति की उम्र 60 से घटाकर 58 वर्ष कर दी है। इससे भा.ज.पा. की मंशा नजर आती है। जबकि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की है। स्वतंत्रता से पहले और 1961 तक केन्द्रीय कर्मचारियों की सेवानिवृति उम्र 55 वर्ष थी जो कि कांग्रेस की सरकार ने 1962 में 58 वर्ष कर दी थी तथा पाचवें वेतन आयोग ने सेवानिवृति की उम्र 58 से 60 करने की सिफारिश की थी जो कि सरकार ने 1998 में लागू कर दी थी।

मैंने खुद छठे वेतन आयोग के गठन की मांग को लेकर धरना दिया था और इस मांग को लोकसभा के पटल पर भी उठाया था। मेरी मांग के बाद छठे वेतन आयोग का गठन हुआ व कांग्रेस की यू.पी.ए. सरकार ने इस आयोग की सिफारिशों को लागू भी किया।

ःःःःःःःःः

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