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छात्र चुनावों में धन-बल का प्रयोग गलत परम्परा की शुरुआत।

द्वारा: अजय माकन]
अध्यक्ष] दि0प्र0क0कमेटी
व्यक्तिगत विचार

छात्र चुनावों में धन-बल का प्रयोग गलत परम्परा की शुरुआत।

छात्र जीवन में राजनीति का परिवेश बहुत ही सीमित होता है क्योंकि उसका मकसद छात्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना व कालेज स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की मांग करने के प्रति सचेत बनाना है।

तकरीबन 10 वर्ष पहले छात्र राजनीति में हिंसा व धनबल काफी बढ़ता जा रहा था जो कि सभी के लिए चिंता का विषय था। इस बाबत् माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 2 दिसम्बर 2005 के आदेश के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जे.एम. लिंगदोह (पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त) की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जिसको छात्र इकाईयों के चुनाव से सम्बन्धित पहलुओं का निरक्षण करना व इस संबध में अपनी सिफारिशें देने को कहा।

जे.एम. लिंगदोह कमेटी ने 26 मई 2006 को अपनी सिफारिशें दे दी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 22 सितम्बर 2006 के आदेश द्वारा इनको लागू करने के आदेश जारी कर दिए। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि छात्र इकाईयों के चुनाव में मुख्य धारा में होने वाली राजनीति की बुराईयों को दूर रखा जाऐ। जैसे कि लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट के पेरा 6.7.7. में कहा गया कि “किसी भी विद्यार्थी को विश्वविद्यालय/कालेज कैम्पस के बाहर न तो कोई प्रोसेसन और पब्लिक मीटिंग और न ही चुनाव प्रचार या कोई प्रोपेगेन्डा बांटने की इजाजत है”। दूसरी ओर रिपोर्ट के पेरा 6.6.4. में कहा गया है कि “छात्र चुनाव में राजनीतिक पार्टियों द्वारा खर्च किए गए धन को रोका जाये और छात्र संगठन के द्वारा स्वेच्छा से दिए गए फंड के अलावा दूसरे किसी अन्य स्रोतों के द्वारा आने वाले फंड को रोका जाये”।

आम आदमी पार्टी ने छात्रों से संबधित अपनी इकाई सी.वाई.एस.एस. को कुछ ही समय पहले लांच किया। ज्ञात हो कि यह वही आम आदमी पार्टी है जिसने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले जनता के सामने एक स्वच्छ] पारदर्शी व धनबल का दुरुपयोग न करने वाली राजनीति पार्टी के रुप में अपने आपको पेश किया। जनता ने उनकी इन बातों को मानते हुए पूर्ण बहुमत भी प्रदान कर दिया। परंतु सत्ता में आने के बाद ही इस पार्टी ने अपने रंग दिखाने शुरु कर दिए।

बड़े ही दुख की बात है कि जिस आम आदमी पार्टी से सी.वाई.एस.एस. का संबध है वह पार्टी 11 सितम्बर को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन के होने वाले चुनाव में पैसा पानी की तरह बहा रही हैं और जितना भी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग हो सकता है] वे कर रहे हैं। उन्होंने अपने विधायकों को भी इस छात्र चुनाव में झौक दिया है। अभी हाल ही में 50 से ज्यादा पेड साईट्स व बस क्यू शैल्टर्स पर करोड़ो रुपये खर्च करके सी.वाई.एस.एस. का प्रचार किया गया व 1 सितम्बर 2015 को तालकटोरा स्टेडियम में सी.वाई.एस.एस. की तरफ से तकरीबन 50 लाख रुपये खर्च करके एक कंसर्ट का आयोजन किया गया। सी.वाई.एस.एस. ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उलंघन करके अपने चुनाव का प्रचार व प्रसार किया है।

श्री अरविन्द केजरीवाल ने इन छात्र चुनावों में पैसे का इस कदर दुरुपयोग किया है कि आने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव बहुत ही मंहगे हो जाऐंगे जिसमें काबिल छात्र नेता चुनाव नहीं लड़ सकेंगे और इशूबेसड राजनीति का अंत हो जायेगा। क्या अरविन्द केजरीवाल ने छात्रों की राजनीति का राजनीतिकरण करने की शुरुआत नहीं कर दी है और सारी मर्यादाओं को भी लांग दिया है।

यदि हम कांग्रेस पार्टी की बात करें तो कांग्रेस हमेशा से एन.एस.यू.आई. द्वारा लड़े जाने वाले छात्र इकाई के चुनावों में एक दूरी बनाकर रखती है और उनके चुनाव के दौरान जीरो इंटरफिरेन्स की नीति पर काम करती है।

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1 reply »

  1. visible from day one. another addition AAP youth and students have procured contacts of students from colleges and going door to door even calling parents also. itni betani and then talk of cleansing the system.

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