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कहां है केजरीवाल जी की स्वच्छ राजनीति?

कहां है केजरीवाल जी की स्वच्छ राजनीति?

भारत में सदियों से प्रशासकों व नेताओं ने समय-समय पर आदर्शवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए सत्ता चलाई है और आदर्शवाद का सही मायने में पालन भी किया है यदि लोकतंत्र में कोई नेता आदर्शवाद के झूठे चोले को ओढ़ता है तो बहुत जल्द ही जनता के सामने उसकी असलियत आ जाती है लेकिन इसके प्रभाव असीमित और दूरगामी होते है और जनता का विश्वास राजनीतिक व्यवस्था से उठने लगता है। जबकि आदर्शवाद मन, वचन और कर्म से अपनाया जाता है न कि दिखावे के लिए।
श्री अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना आंदोलन का सहारा लेकर राजनीति की शुरुआत की और दिल्ली की जनता के सामने एक झूठी आदर्शवादी राजनीति का माडल प्रस्तुत किया। जिसमें स्वच्छ, अपराध व भ्रष्टाचार मुक्त शासन का आदर्श जनता के सामने रखा। जनता ने उनकी इस बात पर विश्वास करते हुए उनको अप्रत्याशित जीत भी दिला दी। परंतु जैसे-जैसे समय बीत रहा है केजरीवाल के आदर्शो की पोल खुलती जा रही है और उनकी असलियत का खुलासा जनता के सामने हो रहा है।

कोई भी नेता ओवर साईज़ कपड़े पहनकर और बेचारा दिखकर कतई आम आदमी नहीं बन सकता। क्योंकि आम आदमी बनने के लिए जनता के दुख दर्द से सरोकार करना होता है, उनकी समस्याओं का निदान करना होता है और जनता की सेवा करनी होती है न कि आम आदमी होने का स्वांग।

विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि राजनीति कोई खेल नहीं, ये सबसे गंभीर व्यवसाय है। आज राजनीति सत्ता प्राप्ति का खेल बनकर रह गई है। अवसरवादी सत्ताधीशों की दृष्टि में जनसरोकार का महत्व घटता जा रहा है। जो लोग ‘आम’ होने का दिखावा करते हैं वे कितने ‘खास’ हो गए है, जनता भी भली भांति समझ रही है। आम आदमी पार्टी ने ‘आम आदमी’ का नारा लगाकर सत्ता प्राप्त की। परंतु उनके 7 महीने की कार्यप्रणाली से स्पष्ट हो गया है कि वे ‘आम आदमी’ और आम आदमी की समस्याओं से कितने दूर है।

आम आदमी पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सत्ता में आने से पहले ‘स्वच्छ राजनीति’ की बात करते थे। वे दावा करते थे कि यदि सत्ता में आए तो राजनीति को पारदर्शी एवं अपराधमुक्त बनाएंगे। उनकी सरकार आम आदमी की सरकार होगी जिसमें आम जनता के आदेशों और भावनाओं को ख्याल रखा जाएगा। परंतु उनकी सरकार के कारनामें देखें तो उनकी करनी कथनी में जमीन आसमान का अंतर दिखाई देता है। श्री अरविन्द केजरीवाल चुनावी सभाओं में कहा करते थे कि वे और उनके मंत्री वी.आई.पी. कल्चर से दूर रहेंगे परंतु मुख्यमंत्री बनते ही श्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने लिए एक आलीशान बंगला अलाट करवा लिया। दूसरी ओर वी.आई.पी. कल्चर को अपनाते हुए और अपनी पार्टी के विधायकों के असंतोष को दबाने के लिए 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की और उनको गाड़ी व कार्यालय सहित मंत्रीतुल्य सुविधाएं देकर दिल्ली की भोली-भाली जनता के खून पसीने की कमाई का दुरुपयोग करने की नई शुरुआत की। प्रशासनिक मर्यादाओं का लांगना केजरीवाल की फितरत बन चुकी है।

शायद केजरीवाल यह भूल गए हैं कि एक सरकार का सर्वेसर्वा बनने के बाद किस प्रकार का व्यवहार और बातचीत का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि सही मायनों में एक राज्य के सर्वेसर्वा को संयम, शालीनता और धैर्य को अपनाते हुए जनहित में कार्य करने चाहिए। अरविन्द केजरीवाल जिन लोगों के भारी समर्थन से सत्ता में आए थे अब वे उनके दर्द से बेगाने हो गए क्योंकि उनके पास लोगों की समस्याओं पर ध्यान देने का समय नहीं है। वे आए दिन आधारहीन मुद्दों पर उपराज्यपाल, केन्द्र सरकार या केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों व दिल्ली नगर निगम से लड़ाई करके क्राईसिस मेन्यूफेक्चर करते रहते है जबकि मुख्यमंत्री का कार्य सामंजस्य स्थापित करके सरकार चलाना होता है। इसका एक दुष्परिणाम यह निकला कि श्री अरविन्द केजरीवाल डेंगू की रोकथाम के लिए समय से पहले एतिहातन कदम नहीं उठा पाये जिसके कारण दिल्ली में कई सौ मासूम लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। अनुभवहीनता के साथ यदि अंहकार आ जाए तो शासन का पतन निश्चित है।

सत्ता प्राप्त करते ही अरविन्द केजरीवाल ने दिखा दिया कि वे प्रत्येक मुद्दे पर दोहरे मांपदंड अपनाते हैं और प्रत्येक मुद्दे की अपनी व्याख्या करते हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के भीतर पारदर्शिता कायम रखने के लिए आंतरिक लोकपाल एडमिरल रामदास की नियुक्ति की थी। परंतु जब रामदास ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे अंतरविरोधों को उजागर करना शुरु किया तो जनलोकपाल का प्रलाप करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने अपनी पार्टी के आंतरिक लोकपाल को ही बाहर का रास्ता दिखा दिया। गौरतलब बात यह है कि बुद्धिजीवी वर्ग जो केजरीवाल के छलावे में आ गया था वह भी उनसे कन्नी काट चुका है।

एक मुख्यमंत्री का अपने आपको अर्नाकिस्ट कहना कितना वाजिब है, यह एक विचारनीय विषय है क्योंकि कहीं न कहीं इस भाषा में तानाशाही की बू आती है। केजरीवाल ने अपनी गतिविधियों से अपने आप को तानाशाह सिद्ध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, प्रो0 अनंत कुमार, पंजाब से सांसद धर्मवीर गांधी और हरिन्दर सिंह खालसा तथा बहुत से जमीनी कार्यकर्ता भी केजरीवाल की तानाशाही के शिकार हुए और उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया क्योंकि इन्होंने आम आदमी पार्टी में चल रही अरविन्द केजरीवाल की तानाशाही का विरोध किया, वे चाहते थे कि आम आदमी पार्टी पारदर्शिता से काम करे और पार्टी में शक्तियों का विकेन्द्रीकरण हो। इससे केजरीवाल की असलियत पता चलती है अर्थात या तो केजरीवाल के तुगलकी फरमानों को मानो अथवा बाहर जाओ। ऐसा व्यक्ति जनता का सच्चा नेता होने का दम कैसे भर सकता है यह लाख टके का प्रश्न है।

जो केजरीवाल बार-बार स्वच्छ व साफ-सुथरी राजनीति की बात किया करते थे आज उनकी पार्टी के विधायकों पर संगीन अपराधों में लिप्त होने के आरोप हैं। त्रिनगर से विधायक व दिल्ली सरकार में कानून मंत्री रहे श्री जितेन्द्र सिंह तोमर पर कानून की फर्जी डिग्री प्राप्त करने के आरोप के कारण उन पर आई.पी.सी. की धारा 420 में एफ.आई.आर. हुई है और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आम आदमी पार्टी महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करती है परंतु मालवीय नगर के विधायक व पूर्व में कानून मंत्री रहे श्री सोमनाथ भारती पर अपनी पत्नी के उत्पीड़न तथा हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ। बड़े ही दुख की बात है कि मंत्री रहे श्री सोमनाथ भारती दिल्ली पुलिस को 19 दिनों तक भगाते रहे जबकि उनकी अग्रिम जमानत जिला न्यायालय व दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी थी और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही सोमनाथ भारती ने दिल्ली पुलिस के सामने समपर्ण किया और उनको जेल जाना पड़ा ।

आम आदमी पार्टी के नांगलोई जाट के विधायक श्री रघुविन्द्र शौकीन पर 1.51 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोप हैं और उनके खिलाफ आई.पी.सी. की धारा 420 में मुकद्मा दर्ज हुआ, आप पार्टी के जिला अध्यक्ष दीपक चैधरी पर एक महिला के साथ लगातार 10 वर्षो तक बलात्कार के मामले का आरोप है। आप पार्टी के कोन्डली से विधायक श्री मनोज कुमार पर धोखाधड़ी के आरोप है और उन पर आई.पी.सी. की धारा 420 के तहत मुकद्मा दर्ज हुआ और उनको जेल की हवा खानी पड़ी। उन पर दिल्ली विधानसभा के चुनावों के दौरान ई.वी.एम. मशीनों को स्कूल से बाहर न जाने देने व सरकारी कामकाज में बाधा पहुचाने को लेकर एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई थी। उत्तम नगर के विधायक श्री नरेश बाल्यान पर चुनाव के दौरान शराब की 497 पेटियां रखने के आरोप को लेकर एफ.आई.आर. दर्ज हुई।

दूसरी ओर करोल बाग से विधायक विशेष रवि, पालम से विधायक भावना गौड़ व दिल्ली कैन्ट के विधायक सुरेन्द्र सिंह पर चुनाव में दिए गए गलत शपथ पत्रों के आरोपों को लेकर विभिन्न न्यायालयों में केस चल रहे हैं। तिलक नगर के आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह पर सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट व सरकारी काम में बाधा पहुचाने के आरोप को लेकर एफ.आई.आर. दर्ज है।

बड़े आश्चर्य का विषय है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों व नेताओं के संगीन अपराधों में लिप्तता के बावजूद भी आज तक श्री अरविन्द केजरीवाल ने उनको अपनी पार्टी में रखा हुआ है और उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही तक भी नहीं की। क्या यही है अरविन्द केजरीवाल की स्वच्छ व पारदर्शी राजनीति? फैसला जनता स्वयं करे।

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1 reply »

  1. दिल्ली केज्रिवाल और आम आदमी पार्टी को वोट दे कर ठगा महसूस करने लगी है I चुनाव se

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