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दिल्ली के 5 लाख रेहड़ी पटरी वालों की रोजी-रोटी छीनने पर AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, MCD एवं NDMC आमदा है।


“कांग्रेस पार्टी रेहड़ी पटरी वाले मजूदरों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी”- अजय माकन
दिल्ली के 5 लाख रेहड़ी पटरी वालों की रोजी-रोटी छीनने पर AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम एवं नई दिल्ली नगर पालिका परिषद आमदा है।
 पूरे भारत वर्ष में 2.50 करोड़ रेहड़ी पटरी वालां की स्थिति को देखकर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी एवं उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी के मार्गदर्शन पर कांग्रेस की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार में तत्कालीन शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री श्री अजय माकन ने रेहड़ी पटरी से सम्बन्धित विशेषज्ञों व रेहड़ी पटरी संगठनों से बातचीत करके रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण बिल 2013 तैयार किया जिसको श्री राहुल गांधी के अथक प्रयासों के द्वारा 2014 में कानूनी रुप से संसद से पास करवा दिया गया।  

 कांग्रेस ने रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून 2014 में ऐसे प्रावधान रखे जिसके द्वारा पूरे देश के रेहड़ी पटरी वालों को व्यवस्थित किया जा सके ताकि वे सम्मानपूर्वक अपनी जीविका कमा सके। इस कानून के द्वारा कांग्रेस ने रेहड़ी पटरी वालों पर पुलिस व नगर निगमों द्वारा होने वाले अत्याचारों पर भी लगाम लगाने का प्रयास किया।

कांग्रेस सरकार द्वारा बनाऐ गऐ रेहड़ी पटरी आजीविका संरक्षण कानून 2014 को दिल्ली में लागू किऐ जाने के बाद के मुख्य बिंदु निम्न है- 

1. ​क्षेत्र की कुल आबादी के 2½% रेहडी पटरी वालों को काम करने के सर्टीफीकेट दिए जाऐंगे (अनुच्छेद 3(2) )। अर्थात दिल्ली में लगभग 5 लाख रेहड़ी पटरी वालों को कानूनी रूप से अपनी आजीविका कमाने की अनुमति मिलनी चाहिए।

2. ​टाउन वेंडिंग कमेटी में रेहड़ी पटरी वालों के नुमाईन्दों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाऐगा। (अनुच्छेद 22(2)(b) )

3. ​टाउन वेंडिंग कमेटी क्षेत्रों का सर्वे करेगी । (अनुच्छेद 3(2) ) अर्थात दिल्ली में जगह चिन्हित करके 5 लाख लोगों को आजीविका कमाने के लिए अनुमति देगी।

4. ​रेहडी पटरी वालों को जब तक चिन्हित जगह नहीं मिल जाती तब तक उनकों हटाया नहीं जाऐगा। (अनुच्छेद 3(3) ) अर्थात जब तक दिल्ली के करीब 5 लाख रेहडी पटरी वालों को चिन्हित जगह नही मिल जाती तब तक उनकों हटाया नहीं जाऐगा।

 रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून 2014 के मुताबिक दिल्ली को 6 महीने के अंदर इस कानून से संबधित रुल बनाने थे तथा एक वर्ष में स्कीम बनाकर लागू करना था। दिल्ली में AAP पार्टी की केजरीवाल सरकार को सत्ता में आऐ 18 महीने से अधिक हो चुके है परंतु अभी तक केजरीवाल सरकार ने रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून को दिल्ली में पूरी तरह से लागू नहीं किया है। जबकि AAP पार्टी रेहड़ी पटरी वाले गरीब व मजदूरों के वोटों के द्वारा ही दिल्ली में ऐतिहासिक जीत के साथ काबिज हुई।

कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी ने भी दिल्ली में रेहड़ी पटरी वालों के हकों की लड़ाई लड़ी जिसके तहत 13 जुलाई 2015 को दिल्ली के रघुबीर नगर में रहने वाले हजारों रेहड़ी पटरी वालों से राहुल गांधी जी ने खुद मिलकर उनसे उनकी समस्याऐं सुनी व AAP पार्टी की दिल्ली सरकार पर इस कानून को लागू करने के लिए दबाव बनाया।

ज्ञात हो कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 12 अगस्त 2015 को श्री अजय माकन के नेतृत्व में हजारों रेहड़ी पटरी वालों के साथ जंतर मंतर पर एक दिन का धरना भी दिया था ताकि AAP पार्टी केजरीवाल सरकार, पुलिस व भाजपा शासित नगर निगम के हाथों हो रही रेहड़ी पटरी वालों पर जाद्दतियों पर काबू पाया जा सके क्योंकि केजरीवाल सरकार रेहड़ी पटरी कानून 2014 को दिल्ली में लागू नही कर रही थी।

 सितम्बर 2016 में जब सरोजिनी नगर, लाजपत नगर व अन्य मार्केटों से रेहड़ी पटरी वालों को गैर कानूनी तरीके से उजाड़ा जाने लगा उस समय दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय माकन ने रेहड़ी पटरी वालों के हकों की लड़ाई को कोर्ट में लड़ने की ठानी तथा दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका डब्ल्यू.पी.(सी.) न. 8042/2016 दाखिल की। श्री अजय माकन की जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिनांक 9.9.2016 को दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका को आदेश जारी किया कि किसी भी रेहड़ी पटरी वाले को बिना कानूनी प्रक्रिया के अगली तारीख तक हटाया नही जायेगा। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद दिल्ली के रेहड़ी पटरी वालों में एक विश्वास पैदा हुआ कि उन पर AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका की जादतियां नही होंगी और वे सम्मान के साथ अपनी जीविका कमा सकेंगे।

 दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 26 सितम्बर 2016 को हजारों रेहड़ी पटरी वालों के साथ जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। क्योंकि AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, भाजपा शासित दिल्ली नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका रेहड़ी पटरी वालों के साथ अत्याचार कर रही थी।  

 दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ के 9.9.2016 के आदेश के बाद कुछ व्यापारिक संस्थाओं ने सरकार से मिलकर अपने गुप्त उदेश्यों की पूर्ति के लिए दिल्ली उच्च न्यायलय में अर्जी लगाई और श्री अजय माकन की जनहित याचिका में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पास किए गए 9.9.2016 के आदेश को निरस्त करने की बात कही। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने 5.10.2016 के आदेश के द्वारा 9.9.2016 के आदेश में बहुत छोटा सा बदलाव करते हुए कहा कि रेहड़ी पटरी जीविका सरंक्षण कानून 2014 से पहले चिन्हित नान स्कवेटिंग जोन में 9.9.2016 का आदेश लागू नही होगा। ज्ञात हो कि दिल्ली की तीनों नगर निगमों ने रेहड़ी पटरी जीविका संरक्षण कानून 2014 के लागू होने से पहले दिल्ली के किसी भी क्षेत्र को नो वेडिंग जोन क्षेत्र घोषित नही किया है। जबकि नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने केवल राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, वीआईपी क्षेत्र और एम्बेसी क्षेत्र को नो वेडिंग जोन घोषित किया है।

 उपरोक्त आदेश के बावजूद AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, भाजपा शासित दिल्ली नगर निगमों तथा नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के क्षेत्र में आने वाले तकरीबन 10 हजार रेहड़ी पटरी वालों को गैर कानूनी तरीके से उजाड़ दिया ।  

 दिनांक 6 अक्टूबर 2016 को AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस, भाजपा शासित तीनों नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने दिल्ली के तकरीबन 10000 रेहड़ी पटरीवालों को जहां पर वे शांति पूर्वक अपनी जीविका कमा रहे थे उनको उजाड़ दिया गया। इसके खिलाफ श्री अजय माकन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी पहले से चली आ रही जनहित याचिका में दिनांक 7 अक्टूबर 2016 को एक अर्जी लगाई जिस पर सुनवाई करते हुए उसी दिन दिल्ली उच्च न्यायायल की मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस, तीनों नगर निगमां व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद को नोटिस जारी किया तथा 19 अक्टूबर 2016 तक जवाब देने के लिए कहा है और यह पूछा कि इन रेहड़ी पटरीवालों को उनकी जगहों से क्यों हटाया गया है। माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि कोई भी रेहड़ी पटरीवाला जो वेडिंग जोन में काम कर रहा है उसको नही हटाया जायेगा।

 हम AAP पार्टी की दिल्ली सरकार, भाजपा शासित नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद से यह मांग करते है कि उजाड़े गए रेहड़ी पटरी वालों को तुरंत प्रभाव से वापस उनकी जगहों पर बैठाया जाये और जल्द से जल्द टाउन वेडिंग कमेटियां बनाकर सर्वे करके रेहड़ी पटरी वालों को स्थायी तौर पर काम करने के लिए प्रमाण पत्र दिए जायें।

 13 अक्टूबर (वीरवार) 2016 को दिल्ल नगर निगम के 12 जोनल कार्यालयों व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद के मुख्यालय पर होने वाले धरनों में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुँचे।

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